उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के बांकेगंज इलाके में हुए भीषण बवाल में एक महत्वपूर्ण खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों द्वारा किए गए विस्तृत अन्वेषण में पता चला है कि इस घटना के पीछे प्रतिमा विवाद केवल एक बहाना था। असली मंशा स्थानीय स्तर पर किसी विवादास्पद जमीन पर अवैध कब्जा करना था। पुलिस प्रशासन ने इसे एक सुनियोजित षड्यंत्र बताया है जिसका उद्देश्य सामाजिक तनाव पैदा करके अपना लक्ष्य हासिल करना था।
प्रारंभिक रिपोर्टों से जब पता चला कि प्रतिमा के चारों ओर विवाद था, तब स्थानीय प्रशासन ने मामले को धार्मिक आधार पर आंकलित किया। लेकिन गहन जांच में यह तथ्य उजागर हुआ कि यह घटना पूर्वनियोजित थी और इसमें बाहरी तत्वों की प्रमुख भूमिका थी। इलाके में भूमि से संबंधित विभिन्न विवाद पहले से विद्यमान थे, जिन्हें इसी बहाने से हल करने का प्रयास किया जा रहा था।
जांच दल ने पाया है कि पत्थरबाजी की घटना काफी सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई थी। भीड़ को भड़काने के लिए विशेष रणनीति अपनाई गई थी और समय-समय पर भड़काऊ बयानबाजी की गई थी। पुलिस की पूछताछ में कई संदिग्धों ने स्वीकार किया है कि उन्हें इस घटना में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। स्थानीय जमीन से जुड़े विवाद को लेकर गहरी कड़वाहट थी जिसका लाभ उठाया गया।
लखीमपुर खीरी पुलिस प्रशासन ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के विरुद्ध सांप्रदायिक हिंसा को भड़काने और जमीन पर अवैध कब्जे का प्रयास करने जैसे गंभीर अपराधों के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। जांच अभी भी जारी है और पुलिस पूरी घटना के पीछे के असली सूत्रधारों को चिन्हित करने के लिए काम कर रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सामाजिक सद्भावना को भंग करने का कोई भी प्रयास कड़ी कार्रवाई के लिए जिम्मेदार होगा।