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उत्तर प्रदेश में श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी में बड़ी बढ़ोतरी, कुशल कामगार को मिलेंगे 3288 रुपये अधिक

उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि की अधिसूचना जारी कर दी है। यह नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी और नोएडा, ग्रेटर नोएडा तथा गाजियाबाद के कर्मचारियों को सर्वाधिक लाभ प्राप्त होगा।

17 अप्रैल 202615 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार संवाददाता0 बार पढ़ा गया
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उत्तर प्रदेश में श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी में बड़ी बढ़ोतरी, कुशल कामगार को मिलेंगे 3288 रुपये अधिक

उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रमिकों के कल्याण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि की अधिसूचना जारी कर दी है। योगी आदित्यनाथ की सरकार इस निर्णय से राज्य के मजदूर वर्ग को आर्थिक राहत प्रदान करने का प्रयास कर रही है। यह बढ़ोतरी कामकाजी लोगों की क्रय शक्ति को बढ़ाने और उनके जीवन स्तर में सुधार लाने के उद्देश्य से की गई है।

प्रदेश सरकार द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, संशोधित न्यूनतम मजदूरी दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगी। इस नई व्यवस्था में राज्य के विभिन्न जिलों को उनकी आर्थिक स्थिति और विकास के आधार पर अलग-अलग मजदूरी दरें निर्धारित की गई हैं। यह विभेदीकृत दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक क्षेत्र की आर्थिक वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए उचित मजदूरी निर्धारित की जाए।

नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद जैसे औद्योगिक और विकसित शहरों के कर्मचारियों को इस बढ़ोतरी से सर्वाधिक लाभ मिलेगा। कुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी में 3288 रुपये तक की वृद्धि की गई है, जो पिछली दरों की तुलना में एक महत्वपूर्ण सुधार है। इन शहरों में औद्योगिक गतिविधियों की अधिकता और जीवन यापन की उच्च लागत को देखते हुए यह निर्णय पूरी तरह उचित है।

राज्य के अन्य जिलों में भी समानुपाती रूप से मजदूरी दरों में वृद्धि की जाएगी, हालांकि वह राशि शहरी क्षेत्रों की तुलना में कम होगी। इस कदम से राज्य के लाखों कर्मचारियों को अपनी आजीविका में सुधार की उम्मीद है। सरकार का यह निर्णय श्रमिक कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है और असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है।

इस नीति के लागू होने से राज्य की अर्थव्यवस्था में सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है क्योंकि अधिक आय वाले श्रमिक अधिक खर्च करेंगे, जिससे स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। सरकार के इस निर्णय की औद्योगिक क्षेत्र द्वारा प्रशंसा की जा रही है, क्योंकि यह एक संतुलित दृष्टिकोण है जो श्रमिकों की आवश्यकताओं और व्यावसायिक व्यवहार्यता दोनों को ध्यान में रखता है।

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