ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने एक मजबूत संदेश देते हुए कहा है कि ईरान के खिलाफ विदेशी शक्तियों की प्रत्येक योजना विफल हो चुकी है। उन्होंने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को नियंत्रण में लाने की किसी भी कोशिश को असफल बताया है। गालिबाफ की ये टिप्पणियां अंतर्राष्ट्रीय दबाव और आर्थिक प्रतिबंधों के विरुद्ध ईरान के दृढ़ रुख को दर्शाती हैं।
ईरान के संसद अध्यक्ष ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि ईरान वेनेजुएला की तरह का राष्ट्र नहीं है, जहां राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक संकट गहराते गए हैं। वह इस बात पर जोर दे रहे हैं कि ईरान के पास मजबूत संस्थान, राष्ट्रीय एकता और भू-राजनीतिक महत्व है जो उसे विरोधी शक्तियों के दबाव का सामना करने में सक्षम बनाता है। यह टिप्पणी अमेरिकी प्रतिबंधों और अंतर्राष्ट्रीय अलगाववादी नीतियों के खिलाफ ईरान का प्रत्यक्ष संदर्भ प्रतीत होती है।
गालिबाफ के इस आक्रामक बयान से पश्चिम एशिया में तनाव के और बढ़ने की आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं। क्षेत्र में पहले से ही इजरायल-हमास संघर्ष, यमन की अस्थिरता और विभिन्न आतंकवादी संगठनों की गतिविधियां चल रही हैं। ईरान की संसद के अध्यक्ष के ऐसे आत्मविश्वासपूर्ण बयान से न केवल अमेरिका बल्कि खाड़ी के देशों को भी चिंता हो सकती है।
विदेश मामलों के विश्लेषकों का मानना है कि ईरान के ये बयान क्षेत्रीय राजनीति को और जटिल बना सकते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से दैनिक तेल के विशाल भंडार गुजरते हैं। ईरान द्वारा इस क्षेत्र पर नियंत्रण के दावे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं।
ईरान की इस आक्रामक नीति के पीछे संभवतः घरेलू राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने और जनता में राष्ट्रीय गौरव की भावना जागृत करने का इरादा है। तथापि, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस तरह के वक्तव्यों को संवेदनशीलता के साथ देख रहा है क्योंकि ये क्षेत्र में सामरिक संतुलन को बिगाड़ सकते हैं।