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होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी गोलीबारी: भारतीय जहाज के कप्तान ने की कड़ी आपत्ति

होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी सेना द्वारा एक भारतीय जहाज पर की गई गोलीबारी की घटना में जहाज के कप्तान ने अपनी आपत्ति दर्ज की है। प्रकाश में आई ऑडियो क्लिप में कप्तान ने ईरानी अधिकारियों से सीधे सवाल उठाया है कि अनुमति देने के बाद क्यों हमला किया गया। इस घटना से भारत-ईरान संबंधों में तनाव की स्थिति बनी है।

19 अप्रैल 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार संवाददाता2 बार पढ़ा गया
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होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी गोलीबारी: भारतीय जहाज के कप्तान ने की कड़ी आपत्ति

होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी सशस्त्र बलों द्वारा एक भारतीय व्यापारी जहाज पर की गई गोलीबारी की घटना ने अंतर्राष्ट्रीय जल परिवहन में सुरक्षा के मुद्दे को फिर से सामने ला दिया है। हाल ही में सामने आई एक ऑडियो क्लिप में जहाज के कप्तान की ईरानी अधिकारियों से तीव्र वार्ता सुनी जा सकती है। कप्तान ने बहुत ही सीधे और स्पष्ट शब्दों में सवाल उठाया है कि जब उन्हें जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दे दी गई थी, तो फिर इस तरह की गोलीबारी क्यों की गई।

ऑडियो क्लिप के अनुसार, कप्तान ने ईरानी पक्ष को याद दिलाया कि उन्होंने पहले ही संचार के माध्यम से अनुमति प्राप्त कर ली थी। इसके बाद भी यह कार्रवाई की गई, जो न केवल अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून के विरुद्ध है, बल्कि व्यापारी जहाजों की सुरक्षा के सिद्धांतों का भी उल्लंघन करती है। कप्तान का रुख पेशेवर लेकिन दृढ़ रहा और उन्होंने इस घटना को औपचारिक रूप से दस्तावेज में दर्ज करने का संकेत दिया।

यह घटना होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं को दर्शाती है, जहां से दुनिया का लगभग एक-तिहाई तेल व्यापार गुजरता है। भारतीय व्यापारी जहाजों के लिए यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है, लेकिन इस तरह की घटनाएं भारतीय नाविकों और जहाज संचालकों को काफी चिंता में डालती हैं। भारत सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की अपेक्षा की जा रही है।

इस घटना के बाद भारत सरकार ने ईरान से इसका औचित्य समझाने की मांग की है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ऐसी कार्रवाइयां अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून के विरुद्ध हैं और व्यापारी जहाजों की मुक्त आवाजाही को प्रभावित करती हैं। इसी बीच, भारतीय शिपिंग इंडस्ट्री भी ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा उपायों को कड़ा करने की मांग कर रही है।

अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठनों और समुद्री कानून के विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी घटनाएं न केवल भारत-ईरान संबंधों को प्रभावित करती हैं, बल्कि वैश्विक व्यापार और शिपिंग उद्योग के लिए भी खतरनाक हैं। इस घटना के बाद भारतीय जहाजों के लिए इस क्षेत्र से गुजरना और अधिक जोखिम भरा हो गया है।

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