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होर्मुज की खाड़ी में फंसे भारतीय नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता: विदेश मंत्रालय

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने होर्मुज की खाड़ी में फंसे भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे के समाधान के लिए ईरान सरकार से लगातार बातचीत चल रही है। भारत सरकार अपने नागरिकों की तत्काल रिहाई और सुरक्षा के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखे हुए है।

20 अप्रैल 20262 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार संवाददाता0 बार पढ़ा गया
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होर्मुज की खाड़ी में फंसे भारतीय नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता: विदेश मंत्रालय

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता राणा अविजीत सिंह जायसवाल ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि होर्मुज की खाड़ी में फंसे भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने इस संवेदनशील मामले पर ईरान के साथ निरंतर राजनयिक वार्ता चलाए जाने की जानकारी दी। भारत-ईरान के बीच होने वाली इन बातचीत का मुख्य उद्देश्य भारतीय नाविकों की तेजी से रिहाई सुनिश्चित करना है।

जायसवाल ने बताया कि विदेश मंत्रालय के सभी विभाग इस मामले पर सक्रियता से काम कर रहे हैं। भारत की ओर से ईरान में स्थित राजनयिक मिशन सीधे तौर पर इन नाविकों की स्थिति की निगरानी कर रहा है। प्रवक्ता ने यह भी सुनिश्चित किया कि भारतीय दूतावास ईरान में फंसे नागरिकों को सभी आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक सहायता प्रदान कर रहा है। इसके अलावा, मंत्रालय प्रभावित परिवारों के साथ भी नियमित संपर्क में बना रहा है।

यह मामला काफी गंभीर है क्योंकि होर्मुज की खाड़ी भारत के शिपिंग मार्गों में एक महत्वपूर्ण स्थान है और यहां भारतीय व्यावसायिक जहाजों का संचालन होता है। स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार कई भारतीय नाविकों को विभिन्न कारणों से ईरानी अधिकारियों द्वारा अवरुद्ध किया गया है। विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि भारत सरकार इन कर्मचारियों की वापसी के लिए सभी संभावित कूटनीतिक चैनलों का उपयोग कर रही है।

भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक संबंध रहे हैं, और दोनों देश कई द्विपक्षीय मुद्दों पर नियमित वार्ता करते हैं। इसी बातचीत के माध्यम से विदेश मंत्रालय होर्मुज में फंसे नाविकों की तेजी से रिहाई के लिए प्रयासरत है। जायसवाल ने मीडिया से अपील की है कि इस संवेदनशील मामले में कूटनीतिक प्रक्रिया को समय दिया जाए ताकि सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकें। विदेश मंत्रालय आने वाले दिनों में इस मामले में और भी तेजी से कार्य करने का वचन दिया है।

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