भारत के विदेश मंत्रालय ने होर्मुज जलडमरू में फंसे अपने नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। विदेश सचिव विजय जयसवाल ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि इन नाविकों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि भारत सरकार इस मामले में ईरान की सरकार के साथ घनिष्ठ समन्वय में कार्य कर रही है।
जयसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत और ईरान के मध्य इस संवेदनशील मुद्दे पर नियमित और सकारात्मक बातचीत जारी है। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर गहन संपर्क बनाए रखे जा रहे हैं ताकि फंसे हुए नाविकों को सुरक्षित रूप से मुक्त कराया जा सके। भारतीय विदेश सचिव ने कहा कि भारतीय दूतावास अपने पूरे प्रयासों में लगा हुआ है और नाविकों की स्थिति पर निरंतर निगरानी रख रहा है।
होर्मुज जलडमरू विश्व के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील जलक्षेत्रों में से एक है, जहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में व्यापारी जहाज गुजरते हैं। इस क्षेत्र में भारतीय नाविकों के फंस जाने की घटना न केवल उनके परिवारों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि भारत की सरकार के लिए भी एक महत्वपूर्ण राजनयिक मामला बन गई है। भारतीय नाविकों को तुरंत रिहा करने के लिए सभी संभावित कूटनीतिक माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है।
विदेश मंत्रालय ने यह भी सुनिश्चित किया है कि प्रभावित नाविकों के परिवारों को नियमित अपडेट दिए जाएं। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि पीड़ितों के परिजनों की भी भावनाओं को समझते हुए उनके साथ पारदर्शी संचार बनाए रखा जा रहा है। भारत सरकार का मानना है कि यह मामला शीघ्र ही एक सकारात्मक समाधान की ओर बढ़ेगा और सभी नाविकों को सुरक्षित घर लौटने का मौका मिलेगा।