उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सीएम हेल्पलाइन 1905 की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते समय एक चिंताजनक तथ्य का सामना करना पड़ा। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा 22,246 जनशिकायतों को बिना किसी उचित कारण के गैरकानूनी तरीके से बंद कर दिया गया था। यह आंकड़ा सामने आते ही मुख्यमंत्री को गहरी नाराजगी हुई और उन्होंने तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप किया।
हेल्पलाइन 1905 जनता की शिकायतों को सुनने और उनका निवारण करने के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इस योजना के तहत नागरिकों को सरकारी विभागों की लापरवाही, भ्रष्टाचार और सेवा में कमियों की शिकायत दर्ज करने का अधिकार है। मुख्यमंत्री धामी का विचार है कि प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से संभाला जाना चाहिए और उसका समुचित निवारण किया जाना चाहिए। शिकायतों को बंद करने का अर्थ यह है कि उन्हें निष्पादित किया गया है, लेकिन यदि यह प्रक्रिया दुरुपयोग की जा रही है, तो यह जनता के विश्वास को तोड़ता है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भविष्य में ऐसी कार्रवाई दोबारा न दोहराई जाए। उन्होंने कहा कि जो भी अधिकारी जनता की शिकायतों के साथ खिलवाड़ करेंगे, उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री का मानना है कि सरकार का प्राथमिक दायित्व जनता की सुनना और उनकी समस्याओं का समाधान करना है। इस संदर्भ में, सभी जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे हेल्पलाइन के माध्यम से आने वाली सभी शिकायतों की विस्तृत जांच करें और उनका निष्पक्ष निवारण सुनिश्चित करें।
यह घटना प्रशासनिक जवाबदेही और नागरिक सेवा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया है कि उत्तराखंड में लोकतांत्रिक मूल्यों और जनसेवा के प्रति कोई समझौता नहीं होगा। आने वाले दिनों में प्रशासन के सभी स्तरों पर इसी प्रकार की समीक्षा की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जनशिकायतों की प्रक्रिया पारदर्शी और प्रभावी बनी रहे।