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वाष्प से जीवन तक: शिवमंगल सिंह 'सुमन' की प्रसिद्ध कविता 'सांसों का हिसाब'

आधुनिक हिंदी साहित्य के महान कवि शिवमंगल सिंह 'सुमन' की कालजयी कविता 'सांसों का हिसाब' जीवन और मृत्यु के गहरे दर्शन को प्रस्तुत करती है। वाष्प के माध्यम से इस कविता में कवि ने मानव जीवन की क्षणभंगुरता और प्रत्येक सांस के मूल्य को सुंदर ढंग से चित्रित किया है। यह कृति पाठकों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करती है और जीवन के वास्तविक अर्थ को समझने का संदेश देती है।

17 अप्रैल 202613 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार संवाददाता0 बार पढ़ा गया
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वाष्प से जीवन तक: शिवमंगल सिंह 'सुमन' की प्रसिद्ध कविता 'सांसों का हिसाब'

हिंदी साहित्य में प्रगतिशील काव्य आंदोलन के अग्रदूत शिवमंगल सिंह 'सुमन' की रचनाएं समाज और मानव मन के गहरे पहलुओं को स्पर्श करती हैं। उनकी प्रसिद्ध कविता 'सांसों का हिसाब' भी इसी परंपरा का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। इस कविता में कवि ने वाष्प के रूपक के माध्यम से जीवन की क्षणभंगुरता को अत्यंत सूक्ष्मता से व्यक्त किया है।

वाष्प एक ऐसी प्राकृतिक घटना है जो हमारे जीवन में निरंतर घटित होती रहती है, किंतु हम इस पर ध्यान नहीं देते। सुमन जी ने इसी वाष्प को प्रतीक बनाकर मानव जीवन की तुलना की है। जिस प्रकार जल वाष्प बनकर आकाश में विलीन हो जाता है, उसी प्रकार मानव भी अपनी सांसों के साथ अपना जीवन बिताता है और एक दिन सदा के लिए लोप हो जाता है। यह दर्शन अत्यंत गहरा और विचारणीय है।

कवि का मूल संदेश यह है कि हमारे जीवन का मूल्य हमारी सांसों में निहित है। प्रत्येक सांस एक अमूल्य क्षण है, जिसे हम कभी पुनः नहीं पा सकते। इसलिए हमें अपने जीवन के प्रत्येक पल को सार्थक बनाने का प्रयास करना चाहिए। सुमन जी की यह कविता पाठकों को यह सीख देती है कि जीवन को हल्के-फुल्के अंदाज में नहीं, बल्कि गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ जीना चाहिए।

'सांसों का हिसाब' कविता की भाषा सरल किंतु प्रभावशाली है। कवि ने सामान्य शब्दों का प्रयोग करके एक गहरा आध्यात्मिक संदेश पहुंचाया है। यह कविता न केवल साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि मानवीय दृष्टि से भी अत्यंत प्रासंगिक है। आज के भाग-दौड़ भरे जीवन में जब हम अपनी सांसों का हिसाब नहीं रखते, तब सुमन जी की यह रचना हमें वापस सही राह पर लाने का काम करती है।

शिवमंगल सिंह 'सुमन' की कविताएं सदैव समाज में चेतना जागृत करने का काम करती आई हैं। 'सांसों का हिसाब' कविता भी इसी उद्देश्य को पूरा करती है और पाठकों को जीवन के प्रति एक नया दृष्टिकोण प्रदान करती है। वाष्प का यह रूपक सार्वभौमिक है और किसी भी काल में प्रासंगिक रहेगा।

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