हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण स्तंभ माने जाने वाले शिवमंगल सिंह 'सुमन' की कविता 'सांसों का हिसाब' एक ऐसी रचना है जो पाठकों के मन को गहराई तक स्पर्श करती है। इस कविता में कवि ने वाष्प का उपयोग करते हुए जीवन की नश्वरता को एक नया आयाम प्रदान किया है। वाष्प की तरह जो पानी से उठता है और हवा में विलीन हो जाता है, उसी प्रकार मानव जीवन भी क्षणभंगुर और अनिश्चित है।
'सुमन' जी की काव्य भाषा में वाष्प केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं है, बल्कि यह हमारी प्रत्येक सांस का प्रतिनिधित्व करता है। जब हम सांस लेते हैं, तो वह हवा में मिल जाती है और फिर कभी वापस नहीं आती। इसी तरह हमारे जीवन के प्रत्येक पल, प्रत्येक क्षण वाष्प की तरह हमारे हाथों से निकल जाता है। कवि इसी दार्शनिक सत्य को अपनी काव्य भाषा के माध्यम से व्यक्त करते हैं।
इस कविता की विशेषता यह है कि यह एक गणितीय दृष्टिकोण से जीवन को देखती है। 'सांसों का हिसाब' शीर्षक से ही स्पष्ट है कि कवि ने हमारी सांसों को गिनने का प्रयास किया है। प्रत्येक सांस एक संख्या है, प्रत्येक पल एक अंक है। जब तक हमारी सांसें चलती हैं, तब तक हम जीवित हैं, और जिस क्षण सांसें रुक जाती हैं, हमारा हिसाब पूरा हो जाता है। यह एक कठोर, लेकिन सार्वभौमिक सत्य है।
शिवमंगल सिंह 'सुमन' की यह रचना प्रगतिवादी काव्य आंदोलन से जुड़ी हुई है, जहाँ कवि सामाजिक चेतना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनी कविता में समाहित करते हैं। वाष्प का प्रतीकात्मक प्रयोग न केवल प्रकृति के साथ मानव का संबंध दिखाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि हमें अपने जीवन का सदुपयोग करना चाहिए। प्रत्येक सांस मूल्यवान है, प्रत्येक पल अमूल्य है।
आधुनिक समय में जब हम अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी में व्यस्त हैं, 'सुमन' की यह कविता हमें रुककर सोचने के लिए बाध्य करती है। वह हमें याद दिलाती है कि जीवन कितना छोटा है और हमारे पास समय कितना सीमित है। इसलिए हमें अपनी सांसों को सार्थक बनाना चाहिए, अपने जीवन को अर्थपूर्ण बनाना चाहिए।