शिवमंगल सिंह 'सुमन' हिंदी साहित्य के उन प्रतिभाशाली कवियों में से हैं जिन्होंने समाज के यथार्थ को अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रस्तुत किया। उनकी प्रसिद्ध कविता 'वाष्प' मानव जीवन के बारे में एक अमूर्त चिंतन प्रस्तुत करती है जो पाठकों के मन को गहराई से छूती है। यह कविता जीवन की नश्वरता और प्रत्येक पल की महत्ता को समझाने का एक सफल प्रयास है।
कविता में 'वाष्प' शब्द का उपयोग करते हुए सुमन ने मानव जीवन की तुलना उस भाप से की है जो कुछ ही क्षणों में हवा में विलीन हो जाती है। यह रूपक अत्यंत प्रभावशाली है क्योंकि यह मानव जीवन की अनिश्चितता और अस्थिरता को दर्शाता है। वाष्प की तरह हमारा जीवन भी क्षणिक है और किसी भी समय समाप्त हो सकता है। कवि इसी विचार के माध्यम से पाठकों को जीवन को सार्थक बनाने की प्रेरणा देते हैं।
'सांसों का हिसाब' शीर्षक से ही कविता की गहराई समझ आती है। सुमन के अनुसार हमारे जीवन का मापदंड केवल साल या दिन नहीं हैं, बल्कि हमारी प्रत्येक सांस हमारे जीवन की गणना में महत्वपूर्ण है। हर एक श्वास हमें अपनी जिम्मेदारियों और अधूरे कामों की याद दिलाती है। इस प्रकार कवि ने सांसों को जीवन का सबसे महत्वपूर्ण इकाई बना दिया है।
सुमन की यह कविता आधुनिक समय में विशेष प्रासंगिकता रखती है जब मनुष्य अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी में हर पल को महत्व नहीं देता। कविता हमें सिखाती है कि हम अपनी सांसों की गणना करें, अपने समय को समझें और हर पल को सार्थकता से जिएं। शिवमंगल सिंह 'सुमन' की यह रचना न केवल साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह दार्शनिक दृष्टिकोण से भी हमें जीवन जीने का सही तरीका सिखाती है।