प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण विधेयक के मुद्दे पर विपक्षी दलों को कड़े शब्दों में लताड़ा है। मोदी ने अपने भाषण में कहा कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के विरुद्ध काम करना एक गंभीर अपराध है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारतीय नारी किसी भी प्रकार के अपमान को कभी नहीं भूलती और इसका असर समाज तथा राजनीति पर दीर्घकाल तक पड़ता है।
पीएम मोदी ने महिला आरक्षण को लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों के सदर्भ में प्रस्तुत किया। उनके अनुसार, जो भी दल महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण का विरोध करता है, वह पाप का कार्य करता है और उसे निश्चित रूप से इसका दंड भोगना पड़ेगा। मोदी ने राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने की अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी नेतृत्व वाली सरकार महिलाओं के विकास और सशक्तिकरण के लिए दृढ़ संकल्प है।
महिला आरक्षण विधेयक को लेकर पीएम ने भारतीय समाज में महिलाओं की ऐतिहासिक भूमिका को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा में नारी को सर्वोच्च सम्मान दिया जाता रहा है और वर्तमान समय में इसी परंपरा को आगे बढ़ाना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। मोदी के अनुसार, महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में अधिक प्रतिनिधित्व देना केवल एक राजनीतिक कदम नहीं है, बल्कि एक सामाजिक दायित्व है।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि आने वाले समय में जनता महिला आरक्षण का समर्थन न करने वाली राजनीतिक ताकतों को चुनावों में उचित उत्तर देगी। उन्होंने जोरदार अपील की कि भारत के सभी नागरिकों को महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एकजुट होना चाहिए। पीएम ने यह भी कहा कि यह विधेयक न केवल महिलाओं के लिए बल्कि पूरे राष्ट्र के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।