महिलाओं के लिए संसद में आरक्षण सुनिश्चित करने वाले नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर देश में राजनीतिक गतिविधियां तीव्र हो गई हैं। लोकसभा में इस महत्वपूर्ण विधेयक के पारित न होने पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की विभिन्न महिला संगठनें आक्रोश प्रकट कर रहे हैं। बिहार की राजधानी पटना में भी एनडीए की महिला मोर्चा सड़कों पर उतरकर विपक्षी दलों के खिलाफ मुखर प्रदर्शन कर रही है।
एनडीए की महिला संगठनें इस बात पर चिंतित हैं कि महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान अभी तक लागू नहीं हो सका है। पटना में हुई रैली में महिला कार्यकर्ताओं ने विपक्षी दलों को महिला सशक्तिकरण में बाधक बताया है। उनका मानना है कि विरोधी पक्ष महिलाओं के अधिकारों को लेकर गंभीर नहीं है और वह केवल राजनीतिक लाभ के लिए आरक्षण का मुद्दा उठाते हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए संवैधानिक संशोधन आवश्यक है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को राजनीतिक प्रक्रिया में समान स्तर पर लाने का प्रयास करता है। पटना की सड़कों पर खिली महिलाओं की भीड़ में युवा और अनुभवी दोनों प्रकार की महिलाएं शामिल थीं जो इस महत्वपूर्ण कानून के समर्थन में आवाज उठा रही थीं।
एनडीए की महिला मोर्चा का मानना है कि महिला आरक्षण बिल का विरोध करने वाले दल दरअसल महिलाओं की शक्ति से डरते हैं। संगठन के प्रवक्ताओं के अनुसार, संसद और विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ने से राष्ट्र के विकास में सकारात्मक परिवर्तन आएंगे। पटना में चलाए जा रहे इस प्रदर्शन के माध्यम से एनडीए की महिला संगठनें संदेश दे रही हैं कि महिलाएं अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।