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ईरान वेनेजुएला नहीं है: संसद अध्यक्ष गालिबाफ का दुश्मनों को दहाड़ता हुआ संदेश

ईरान की संसद के अध्यक्ष मुहम्मद बागेर गालिबाफ ने घोषणा की है कि दुश्मनों की सभी योजनाएं विफल हो गई हैं और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलने की साजिश नाकाम हुई है। उन्होंने जोरदार शब्दों में कहा कि ईरान वेनेजुएला जैसा कमजोर देश नहीं है और किसी भी दबाव में नहीं झुकेगा। उनके इस बयान से पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं।

19 अप्रैल 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार संवाददाता0 बार पढ़ा गया
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ईरान वेनेजुएला नहीं है: संसद अध्यक्ष गालिबाफ का दुश्मनों को दहाड़ता हुआ संदेश

ईरान की संसद के अध्यक्ष मुहम्मद बागेर गालिबाफ ने एक आक्रामक बयान जारी करते हुए दावा किया है कि पश्चिमी देशों और उनके सहयोगियों की सभी योजनाएं ईरान के खिलाफ विफल हो चुकी हैं। उन्होंने विशेष रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलने की साजिश को नाकाम बताया है, जो विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। गालिबाफ का यह बयान क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को दर्शाता है।

ईरान के संसद अध्यक्ष ने अपने बयान में ईरान की तुलना वेनेजुएला से नहीं करने की चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान एक शक्तिशाली और आत्मनिर्भर राष्ट्र है जो किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के समक्ष नहीं झुकेगा। गालिबाफ के शब्दों में, ईरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए कृतसंकल्प है और कोई भी बाहरी शक्ति इसे अपने नियंत्रण में नहीं ला सकती। यह बयान ईरान की दृढ़ राजनीतिक इच्छा और सैन्य आत्मविश्वास को प्रदर्शित करता है।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर गालिबाफ का बयान विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह क्षेत्र विश्व की लगभग 30 प्रतिशत तेल व्यापार के लिए जिम्मेदार है। ईरान ने पिछले वर्षों में इस जलडमरूमध्य को नियंत्रित करने के प्रयासों में अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया है। गालिबाफ का दावा है कि अमेरिका और यूरोपीय देशों द्वारा इसे अपने नियंत्रण में लाने की कोशिशें पूरी तरह विफल हो गई हैं।

ईरान के इस जोरदार रुख के कारण पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति बनी हुई है। क्षेत्र में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका जैसी शक्तियां ईरान की इन गतिविधियों पर गहरी चिंता व्यक्त कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आक्रामक बयान भविष्य में सैन्य टकराव की स्थिति को और जटिल बना सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति के पर्यवेक्षकों के अनुसार, ईरान का यह रुख अपनी आंतरिक राजनीति को मजबूत करने और जनता के बीच राष्ट्रवादी भावना जागृत करने का भी प्रयास है। गालिबाफ का बयान ईरान की संसद में कट्टरपंथी गुटों को संतुष्ट करने के लिए दिया गया प्रतीत होता है। आने वाले समय में इस क्षेत्र में किस तरह की घटनाएं घटती हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।

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