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अमेरिका-ईरान तनाव: ट्रंप की नाकाबंदी पर ईरानी राष्ट्रपति का तीखा प्रहार

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और गहरा हो गया है, जब ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजशकियान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ आर्थिक नाकाबंदी पर तीव्र प्रतिक्रिया दी है। पेजशकियान ने ट्रंप के दावों को झूठा बताते हुए कहा है कि वह एक घंटे में सात झूठे दावे कर रहे हैं।

18 अप्रैल 20262 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार संवाददाता0 बार पढ़ा गया
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अमेरिका-ईरान तनाव: ट्रंप की नाकाबंदी पर ईरानी राष्ट्रपति का तीखा प्रहार

अमेरिका और ईरान के बीच द्विपक्षीय संबंधों में नए सिरे से तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। यह विवाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाई गई कठोर आर्थिक नाकाबंदी को लेकर है, जिसके विरुद्ध ईरानी नेतृत्व ने सख्त आपत्ति जताई है। इस बढ़ते विवाद में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजशकियान सीधे मैदान में उतर गए हैं और ट्रंप की नीतियों का तीव्र विरोध कर रहे हैं।

पेजशकियान ने अपने बयान में एक कड़ी आलोचना की है, जिसमें उन्होंने कहा है कि ट्रंप प्रशासन लगातार गलत और भ्रामक दावे कर रहा है। उनके अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति एक घंटे की अवधि में सात विभिन्न झूठे दावे करते हैं, जो ईरान के खिलाफ प्रचार अभियान का हिस्सा हैं। ईरानी नेता ने इसे अंतर्राष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया है और कहा है कि यह दोहरे मानदंड का प्रतीक है।

ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाई गई नाकाबंदी ईरान की अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाल रही है। इस नाकाबंदी के कारण ईरान का तेल निर्यात प्रभावित हुआ है, जो देश की जीडीपी का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। साथ ही, ईरानी आम जनता को खाद्य सामग्री, दवाइयों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। पेजशकियान के अनुसार, यह नाकाबंदी मानवाधिकारों का उल्लंघन है और ईरानी लोगों को अनावश्यक कष्ट पहुंचा रही है।

ईरानी राष्ट्रपति ने अपने भाषण में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह अमेरिका की एकतरफा कार्रवाइयों का विरोध करे। उन्होंने कहा है कि ईरान शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए किसी भी कीमत पर लड़ने के लिए तैयार है। पेजशकियान ने एक बार फिर से ट्रंप प्रशासन को चेतावनी दी है कि ईरान के खिलाफ कोई भी आक्रामक कदम गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे।

यह पारस्परिक आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक तनाव को और बढ़ाने का संकेत दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की वाक्-युद्ध की स्थिति में किसी भी पक्ष के लिए लाभकारी नहीं है और यह क्षेत्रीय शांति के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।

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