गुरुवार, 25 जून 2026भाषा: हिंदी
शुक्रवार डिजिटल
raajneeti

आपातकाल को अमित शाह ने बताया काला अध्याय

अमित शाह ने 1975 के आपातकाल को इतिहास का काला अध्याय बताया। उन्होंने कांग्रेस पर संविधान की आत्मा को कुचलने का आरोप लगाया। यह बयान हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान दिया गया।

25 जून 20262 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क2 बार पढ़ा गया
WXfT

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 1975 के आपातकाल को इतिहास का काला अध्याय बताते हुए कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि इस दौरान संविधान की आत्मा को कुचला गया था। यह बयान उन्होंने एक कार्यक्रम में दिया, जिसमें उन्होंने आपातकाल के प्रभावों पर चर्चा की।

अमित शाह ने अपने बयान में यह भी कहा कि आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की हत्या की गई थी। उन्होंने कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इसने भारतीय लोकतंत्र को कमजोर किया। उनका यह बयान उस समय आया है जब देश आपातकाल की 48वीं वर्षगांठ मना रहा है।

आपातकाल का यह दौर 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक चला था। इस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा की थी, जिसके तहत कई नागरिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया था। यह घटना भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखी जाती है।

इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन अमित शाह के बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह पार्टी लोकतंत्र के मूल्यों का पालन नहीं कर रही है।

इस बयान का आम लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ा है। कई लोग इसे एक बार फिर से याद करने का अवसर मानते हैं कि कैसे आपातकाल ने भारतीय समाज को प्रभावित किया। कुछ लोगों का मानना है कि यह बयान वर्तमान राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में भी महत्वपूर्ण है।

हाल ही में, कई राजनीतिक दलों ने आपातकाल के मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। इस संदर्भ में, कुछ विपक्षी दलों ने अमित शाह के बयान का विरोध किया है। वे इसे राजनीतिक लाभ के लिए उठाया गया मुद्दा मानते हैं।

आगे क्या होगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर ध्यान देंगे कि क्या अमित शाह का यह बयान आगामी चुनावों में किसी प्रकार का प्रभाव डालेगा। इसके अलावा, कांग्रेस पार्टी इस पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार होगी।

अंत में, अमित शाह का यह बयान आपातकाल के इतिहास को फिर से उजागर करता है। यह भारतीय लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है कि नागरिक अधिकारों का संरक्षण कितना आवश्यक है। इस तरह के बयान राजनीतिक विमर्श को और भी गहरा बनाते हैं।

टैग:
आपातकालअमित शाहकांग्रेसभारतीय राजनीति
WXfT

raajneeti की और ख़बरें

और पढ़ें →