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असम सीएम ने बाड़बंदी की मांग को बताया ऐतिहासिक भूल

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी की मांग को ऐतिहासिक भूल बताया है। उन्होंने 1985 के समझौते के संदर्भ में यह टिप्पणी की। यह बयान असम-बांग्लादेश सीमा विवाद के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

14 जून 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क6 बार पढ़ा गया
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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हाल ही में बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी की मांग को ऐतिहासिक भूल करार दिया है। यह बयान उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान दिया, जिसमें उन्होंने 1985 के असम समझौते का जिक्र किया। यह घटना असम में सीमा विवाद के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सीएम सरमा ने कहा कि बाड़बंदी की मांग करने से असम के लोगों को कोई लाभ नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि 1985 का समझौता असम की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को सुरक्षित करने के लिए किया गया था। इस समझौते के तहत, असम में रहने वाले लोगों के अधिकारों की रक्षा की गई थी।

1985 का असम समझौता असम आंदोलन के बाद हुआ था, जिसका उद्देश्य राज्य में अवैध प्रवासियों की समस्या को हल करना था। इस समझौते के तहत, असम में रहने वाले लोगों की पहचान को मान्यता दी गई थी। यह समझौता असम के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जाता है।

सीएम हिमंत ने इस संदर्भ में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया, लेकिन उनके विचारों ने राजनीतिक हलकों में चर्चा को जन्म दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाड़बंदी की मांग से असम की स्थिति में सुधार नहीं होगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब सीमा विवाद को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं।

इस बयान का आम लोगों पर प्रभाव पड़ सकता है, विशेषकर उन समुदायों पर जो सीमा विवाद से प्रभावित हैं। कई लोग बाड़बंदी की मांग को उचित मानते हैं, जबकि कुछ इसे असम की सांस्कृतिक पहचान के लिए खतरा मानते हैं। इस प्रकार, यह बयान असम में सामाजिक और राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ा सकता है।

इस बीच, असम सरकार ने सीमा सुरक्षा को लेकर कुछ नई योजनाओं की घोषणा की है। इन योजनाओं के तहत, सीमा पर निगरानी बढ़ाने और अवैध प्रवासियों की पहचान करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। यह कदम असम की सुरक्षा स्थिति को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आगे की कार्रवाई में, असम सरकार को इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों और स्थानीय समुदायों के साथ संवाद करना होगा। यह आवश्यक है कि सभी पक्षों के विचारों को सुना जाए और एक संतुलित समाधान की दिशा में कदम बढ़ाया जाए। इससे असम में शांति और स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

इस प्रकार, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का बयान असम-बांग्लादेश सीमा विवाद के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। यह बयान न केवल राजनीतिक चर्चा को बढ़ावा देगा, बल्कि असम के लोगों की भावनाओं को भी प्रभावित करेगा। 1985 के समझौते के महत्व को समझते हुए, सभी पक्षों को एक साथ मिलकर इस मुद्दे का समाधान निकालना होगा।

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