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देश के 25 राज्यों में आंधी-पानी और ओलावृष्टि की संभावना

18 जून तक देश के 25 राज्यों में आंधी-पानी और ओलावृष्टि की संभावना है। इस मौसम के पीछे अल नीनो का प्रभाव बताया जा रहा है। यह स्थिति मानसून पर भी असर डाल सकती है।

13 जून 20262 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क4 बार पढ़ा गया
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देश के 25 राज्यों में 18 जून तक आंधी-पानी और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने यह जानकारी दी है कि इस अवधि में कई क्षेत्रों में तेज हवाएँ चलने और बारिश होने की संभावना है। यह स्थिति विशेष रूप से उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में अधिक प्रभावी हो सकती है।

मौसम विभाग के अनुसार, इस समय देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। आंधी और ओलावृष्टि के साथ-साथ बारिश की संभावना भी बनी हुई है। यह सभी घटनाएँ मानसून के आगमन से पहले हो रही हैं, जो कि आमतौर पर जून के मध्य में शुरू होता है।

अल नीनो का प्रभाव इस मौसम के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण बताया जा रहा है। अल नीनो एक जलवायु पैटर्न है, जो समुद्र की सतह के तापमान में परिवर्तन लाता है और इसके परिणामस्वरूप मौसम में असामान्यताएँ उत्पन्न होती हैं। इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव के चलते मानसून की स्थिति पर भी असर पड़ सकता है।

हालांकि, मौसम विभाग ने इस स्थिति पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो के कारण मानसून के सामान्य से कम या अधिक होने की संभावना है। इससे किसानों और कृषि पर प्रभाव पड़ सकता है।

इस मौसम के बदलाव का आम लोगों पर गहरा असर पड़ सकता है। बारिश और आंधी के कारण कई क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा, ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुँचने की आशंका भी जताई जा रही है।

इस बीच, मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि लोग मौसम की जानकारी पर ध्यान दें और आवश्यक सावधानियाँ बरतें। इससे पहले भी कई बार मौसम के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है।

आगे की स्थिति को देखते हुए, मौसम विभाग ने 18 जून के बाद के मौसम की भविष्यवाणी करने का आश्वासन दिया है। इस समय तक मौसम में और भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। लोग मौसम के अपडेट्स पर नजर बनाए रखें।

इस घटनाक्रम की महत्वपूर्णता इस बात में है कि यह किसानों और आम लोगों के लिए मौसम की स्थिति को प्रभावित कर सकता है। अल नीनो का प्रभाव और उसके परिणामस्वरूप होने वाले मौसम परिवर्तन, देश की कृषि और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल सकते हैं।

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